अमेरिकी खुफिया विभाग की रिपोर्ट: कोरोना राहत योजनाओं में 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर [यानी 75 खरब भारतीय रुपियों] का घोटाला !

अमेरिकी खुफिया विभाग की रिपोर्ट: कोरोना राहत योजनाओं में 100 बिलियन डॉलर [75 खरब भारतीय रुपियों] का घोटाला ।

हाल ही में अमेरिका की एक खुफिया एजेंसी ने एक हैरान कर देने वाली रिपोर्ट जारी की है।इस रिपोर्ट के अनुसार कोरोना महामारी के शिकार लोगों की मदद के लिए अमेरिकी सरकार ने जो योजनाएं शुरू की थीं, उनमें बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी होने की बात सामने आई है। यूएस सीक्रेट सर्विस एजेंसी ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है, कि धोखेबाजों ने सरकार को लगभग 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 75,43,50,00,00,000(75 खरब)भारतीय रुपियो का घोटाला किया गया था।

यूएस की एक खूफिया सर्विस एजेंसी ने किया ऐसा खुलासा  ।

अभी भी 900 से अधिक मामलों की चल रही जांच
कई व्यवसाय के मालिकों ने उठाए बड़े लोन

वॉशिंगटन: अमेरिका में कोरोना सहायता (Corona Relief Fund) के नाम पर खरबों का घोटाला सामने आया है।यूएस की ही एक सीक्रेट सर्विस एजेन्सी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कई  धोखेबाज अमेरिकी नागरिकों एवं व्यवसाय के मालिकों  ने सरकार से करीब $100 बिलियन यानी करीब 75 खराब भारतीय रुपए हड़प कर लिए।अमेरिकी श्रम विभाग ने खुलासा किया कि बेरोजगारी लाभ (Unemployment Benefits) में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हुई है। लेकिन, इस पर एजेंसी ने कहा है कि एजेंसी ने  बेरोजगारी लाभ और लोन धोखाधड़ी की कुछ राशि वसूलने में सफलता भी हासिल की है, लेकिन फिर भी एक बड़ा हिस्सा धोखेबाजों के पास अभी भी कायम है।इसीलिए अमेरिकी जांच एजेंसियां कोरोना महामारी के दौरान धोखाधड़ी से जुड़े 900 से अधिक मामलों की गहनता से जांच कर रही हैं।

कैसे हुई इतनी बड़ी धोखेबाजी
अभी तक मिली जानकारी के अनुसार अमेरिकी न्याय विभाग ने अब तक 150 लोगों पर मुकदमा चलाया है और पे-चेक प्रोटेक्शन फंड घोटाले में 75 मिलियन अमेरिकी डॉलर भी जब्त किए हैं। खूफिया एजेंसी ने जानकारी दी है कि धोखाधड़ी पे-चेक प्रोटेक्शन प्रोग्राम (PPP), आर्थिक नुकसान आपदा ऋण (EIDL) कार्यक्रम और बेरोजगारी बीमा (Unimployment Insurance) कार्यक्रम से संबंधित थी. एजेंसी ने बताया कि PPP यानि धोखाधड़ी की जांच में यह सामने आया कि व्यवसाय मालिकों ने बड़े कर्ज प्राप्त करने के लिए पेरोल खर्च बढ़ा दिया था और कई धोखेबाजों ने एक से ज्यादा लोन के लिए आवेदन किया था. उन्होंने अपनी प्रॉपर्टी और इनकम के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़कर पेश किया था, ताकि किसी को कोई शक न हो.
खुद को बताया बेरोजगार 
बेरोजगारी बीमा धोखाधड़ी के मामले में एजेंसी ने पाया कि आपराधिक समूहों ने बड़े पैमाने पर लोगों की पहचान चुराकर घोटाले को अंजाम दिया. उन्होंने खुद को बेरोजगार बताया और सरकारी योजना का लाभ उठाते रहे. इंस्पेक्टर जनरल माइकल जे. मिसल ने कहा, 'COVID-19 को अपराधियों ने मौके के तौर पर लिया और सरकारी सहायता को हड़पने के लिए साजिश रची'. उन्होंने कहा कि सभी मामलों की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

150 लोगों के मेल में लगाई सेंध  
जांच एजेंसी ने बताया कि एक व्यक्ति ने कथित तौर पर 150 से अधिक लोगों के यूएस मेल में सेंध लगाई और चेक से  700,000 डॉलर से अधिक हड़प लिए। कोरोना से सबसे ज्यादा अमेरिका को प्रभावित किया था। बड़े पैमाने पर लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा था. जिसके बाद सरकार ने पीड़ितों को सहायता प्रदान करने के लिए कई योजनाएं लॉन्च की। इसमें बेरोजगारी भत्ता और आसान लोन जैसी योजनाएं भी शामिल थीं।

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