आज से 15 से 18 साल का टीकाकरण: 10 करोड़ बच्चों को देनी है वैक्सीन, दो दिन में 7.90 लाख का रजिस्ट्रेशन

आज से 15 से 18 साल का टीकाकरण: 10 करोड़ बच्चों को देनी है वैक्सीन, दो दिन में 7.90 लाख का रजिस्ट्रेशन


3 जनवरी यानी आज से 15 से 18 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के टीकाकरण के लिए CoWIN ऐप पर रविवार तक 7 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने भी इस टीकाकरण कार्यक्रम के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बात की है. मनसुख मंडाविया ने कहा है कि बच्चों के टीकों को आपस में मिलाने से बचने के लिए वैक्सीन सेंटर पर अलग लाइन, अलग टाइमिंग और अलग टीकाकरण टीम बनाई जाए.

  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 27 दिसंबर को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, केवल 15 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों को ही टीका लगाया जाएगा। मंडाविया ने स्वास्थ्य मंत्री, मुख्य सचिव और राज्यों के अतिरिक्त मुख्य सचिव के साथ एक ऑनलाइन बैठक की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि टीकाकरण कार्यक्रम ठीक से चलाया जा सके।

  रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से किया जा सकता है


बच्चों के टीके के लिए पंजीकरण कार्यक्रम शनिवार से शुरू हो गया। सरकार की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक कोविन एप पर पहले से बना हुआ खाता या नया खाता बनाकर पंजीकरण किया जा सकता है. इसके अलावा टीकाकरण केंद्र पर जाकर भी पंजीकरण कराया जा सकता है। रविवार रात तक, 15 से 18 वर्ष की आयु के 7.90 लाख बच्चों ने वैक्सीन के लिए पंजीकरण कराया है।

  पीएम ने 25 दिसंबर को की थी घोषणा
  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर को राष्ट्र के नाम अपने संदेश में 15-18 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों और किशोरों के लिए 3 जनवरी से कोरोना टीकाकरण शुरू करने की घोषणा की थी। वर्तमान में देश में 15-18 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों की संख्या लगभग 10 करोड़ है। दुनिया के 30 से अधिक देशों में बच्चों का टीकाकरण पहले से ही किया जा रहा है।

  भारत में बच्चों का टीकाकरण क्यों आवश्यक है?


#यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक, कोरोना वैक्सीन बच्चों को कोविड-19 से संक्रमित होने से बचाने में मदद करती है।

 # कोरोना वैक्सीन गंभीर बीमारियों, अस्पताल में भर्ती होने, लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और बच्चों में मौत के खतरे को कम करती है।

 # स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, उन बच्चों के लिए टीकाकरण बहुत महत्वपूर्ण है जो कोविड-19 के उच्च जोखिम वाले समूह का हिस्सा हैं। यानी मोटापे, मधुमेह या अस्थमा से पीड़ित बच्चे, जिन्हें कोविड-19 से गंभीर रूप से बीमार होने का सबसे ज्यादा खतरा है, उनके लिए भी जरूरी है।

 # कोविड-19 से अधिक संक्रमित क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए भी टीकाकरण जरूरी है।

 # दक्षिण अफ्रीका में, ओमाइक्रोन ने 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में अस्पताल में भर्ती होने की दर में वृद्धि की है। ऐसे में, भारत में ओमाइक्रोन को देखते हुए, बच्चों का टीकाकरण शुरू करना एक महत्वपूर्ण कदम है।

  #बच्चों के टीकाकरण से उनके लिए स्कूल जाना और खेलकूद और अन्य भीड़-भाड़ वाली गतिविधियों में भाग लेना सुरक्षित हो जाता है।

  #बच्चों में भले ही कोरोना के कम गंभीर लक्षण दिखें, लेकिन बच्चे इस वायरस के वाहक बन जाते हैं। इसलिए बच्चों का टीकाकरण जरूरी है।

#  भारत में अब तक सिर्फ 61 फीसदी वयस्क आबादी को ही कोरोना वैक्सीन की दोनों खुराकें मिली हैं. यानी देश की एक बड़ी आबादी का पूरी तरह टीकाकरण नहीं हुआ है, ऐसे लोगों के आसपास रहने वाले बच्चों में संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए टीकाकरण शुरू करने की जरूरत है.
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